तेरे इश्क मे मैं इस तरह नीलाम हो जाऊं...
आख़री हो तेरी बोली और मैं तेरे नाम हो जाऊं...
कहनें लगें सब लोग मुझे तेरा पागल आशिक...
मैं तेरे नाम से शहर भर में यूं बदनाम हो जाऊं...
जब वक्त हो तेरी मेरी खुशियों और ग़मों के बटवारे का...
देकर तुझे अपनी सारी खुशियां लेकर तेरे सारे ग़म मैं बेईमान हो जाऊं...
जिसकी राह तकती रहें आंखें तेरी हर दम...
मै तेरे दर का वो महमान बन जाऊं...
मेरे हर लफ्ज़ में गूंजे बस आवाज़ तेरी...
अपने लबों को सी कर तब मैं बेज़ुबान बन जाऊं...
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